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कछुआ और गिद्ध की कहानी | Tortoise and Vulture story in hindi

कछुआ और गिद्ध की कहानी | Tortoise and Vulture story in hindi 

एक घने जंगल के बीचो-बीच एक तालाब था जिस में एक कछुआ रहता था उसे उड़ने का बड़ी इच्छा थी और वह हर वक्त यही सोचता रहता कि हम आसमान में कैसे उड़े वह जंगल कितना खूबसूरत होगा कि आसमान में तरह तरह के पक्षी उड़ते नजर आते है जब उसे प्यास लगती है तो आकर तालाब में पानी पीते।
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कछुआ और गिद्ध की कहानी | Tortoise and Vulture story in hindi

और कछुआ हमेशा उसे देखते रहता उसे देख देख कर हमेशा वह आसमान में उड़ने का सपना देखता और कहता देखो तो यह पंछी आसमान में कैसे उड़ रहा है चारों तरफ बादल ही बादल कितना मजा आता होगा न ऊपर से पूरी दुनिया को दिखने में जब उनका मन करता होगा तब वह बादल से खेलते होंगे।

कछुआ बेचैन हो उठा वह सोचते थे वह उड़े तो उड़े कैसे दिन प्रतिदिन उसकी इच्छा बढ़ती ही जा रही थी।
तब उसे एक तरकीब सूझी और वह गीत से बात करने गया और गिद्ध पास ही में एक पेड़ पर बैठा हुआ था।

कछुआ बोला गिद्ध भाई, गिद्ध भाई गीत बोला कछुआ तुम यहां बोलो क्या बात है। आज तालाब से बाहर आने का कैसे मन हुआ।

फिर कछुआ बोला गिद्ध भाई पूरे जगत में आप ही तो है जो सबसे ज्यादा मजबूत है और सबसे ऊंचा उड़ते हैं। गिद्ध बोला बात तो सही है पर क्या बात है कछुए इतना मक्खन क्यों लगा रहे हो उड़ने में तुम्हारी क्या दिलचस्पी तुम्हें कौन सा काम टूरबाना है मुझसे

कछुआ बोला मेरी एक इच्छा है और वह सिर्फ आप ही पूरी कर सकते हैं। 
गिद्ध बोला बताओ मेरे कछुए मैं पूरी कोशिश करूंगा तुम्हारा इच्छा पूरी करने का।
फिर कछुआ बोला मैं चाहता हूं मैं भी आसमान में ऊरू और आसमान से पूरी दुनिया देखूं।
फिर गिद्ध बोला यह कैसे हो सकता है उड़ने के लिए तो पंखों दो पंखों  होती है और वह तो तुम्हारे पास है ही नहीं।

फिर कछुआ बोला इसीलिए मैं तो आपके पास आया हूं आप मुझे अपने पंजों में फंसाकर ऊपर ले जाकर छोड़ देना इस तरह मैं उड़ सकूंगा और खूबसूरत नजारा देख पाऊंगा।

फिर गिद्ध बोला देखो इससे तुम्हारे जान को खतरा हो सकता है कछुआ बोलता है नहीं कुछ नहीं होगा बस मैं जैसा कहता हूं वैसा कर दीजिए और काफी रिक्वेस्ट करने लगा।

गिद्ध ने कहा ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी कछुआ की ख्वाहिशों पूरी करने के लिए कितने उसे अपने पंजों में फंसाया और उड़ाकर ऊपर ले गया आसमान की सैर कराने और आखिरकार कछुए को आसमान में उड़ने का सपना पूरा हो ही गया।

कछुआ ने गिद्ध से कहा गिद्ध भाई यहां से कितना खूबसूरत लगता है बादल भी हमारे कितने करीब है बस आप थोड़ा ऊपर ले जाकर अपनी पकड़ ढीली कर देना और मैं उड़ने लगूंगा

गिद्ध ने कहा कछुए मैं तुम्हें फिर से समझा रहा हूं यह तुम्हारे लिए सही नहीं है तुम नहीं उड़ सकते

फिर कछुआ ने कहा आप बस पकड़ ढीली कीजिए और देखिए मैं कैसे उड़ता हूं फिक्र मत कीजिए कुछ नहीं होगा

गिद्ध के समझाने पर भी कछुआ नहीं माना और थोड़ा ऊपर जाकर कितने अपनी पकड़ ढीली कर दी और कछुआ नीचे गिरने लगा और कहने लगा अरे वाह अब तो मैं भी उड़ रहा हूं मजा आ गया हा हा हा हा हा और कछुआ उलट गया और कहने लगा अरे यह क्या मैं तो गीर रहा हूं गिद्ध भाई बचाओ मुझे पकड़ो नहीं तो मैं गिर जाऊंगा।

उड़ने की चाहत में कछुआ ऊपर तो पहुंच गया लेकिन उड़ता कैसे और वह धड़ाम से नीचे आकर गिरा

कछुआ कहता है अरे मैं तो मर गया मैंने ये क्या किया कितना बेवकूफ हो मैं भी गिद्ध भाई ने कितना समझाया था पर मैंने उनकी एक न सुनी  यह तो अच्छा है कि मैं अपनी कवच की वजह से बच गया नहीं तो आज मेरा खेल ही खत्म हो जाता।

इस प्रकार कछुए को अपनी गलती का एहसास हुआ जिद में आकर कोई काम नहीं करना चाहिए और उसने ऐसी गलती फिर कभी नहीं की और वह तलाब में खुशी-खुशी रहने लगा।

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें सपने तो देखना चाहिए मगर पैसा सपने पूरे करने का कोशिश नहीं करना चाहिए जो कि कभी पूरे ही ना हो सके। इसीलिए हमारे पास जो है हमें उसी में खुश रहना चाहिए।

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